" सट्टा मटका (satta matka) | सटका मटका | कर्ली मटका | मटका क्या है

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सट्टा मटका (satta matka) | सटका मटका | कर्ली मटका | मटका क्या है


सट्टा मटका (satta matka) | सटका मटका | कर्ली मटका | मटका क्या है  



सट्टा मटका या सटका मटका या कर्ली मटका यह सब एक ही चीजों के दो तीन नाम है सट्टा मटका एक प्रारंभिक जुआ जैसा ही खेल है जो हमारे देश को स्वतंत्र मिलने से पहले से ही खेला जा रहा है इतना पुराना होने के बावजूद लोगों के प्रति इसकी दीवानगी कम नहीं है इसमें फायदा लगभग 6 गुना से 8 गुना तक होता है 

इस वजह से लोग इस खेल को इतना पसंद करते हैं और महाराष्ट्र और नासिक जैसी जगह पर यह खेल आज भी काफी प्रसिद्ध है टेक्नोलॉजी विकसित होने के साथ-साथ इन खेलों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी लाए जाने की कोशिश की गई है लेकिन भारत सरकार द्वारा सट्टेबाजी कि खेलों को ben के चलते कि ज्यादा विकसित नहीं हो पाए आज इस आर्टिकल में हम सटका मटका किया Karli matka के पूरे इतिहास को जानेंगे और देखेंगे इसकी शुरुआत कहां से हुई 

 आज यह किस स्थिति में  है यह खेल
 तो चलिए एक-एक करके इन पहलुओं पर नजर डालते हैं

    सटका मटका की शुरुआत 


    यह खेल सबसे पहले 1945 में चालू हुआ था पहले इस खेल में दो मिलो का अहम योगदान था जिनका नाम बॉम्बे टैक्सटाइल और न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से इस खेल की शुरुआत हुई

     शुरुआती दिनों में कपास के मूल्य का ओपनिंग और क्लोजिंग रेट पर पूर्व अनुमान से सट्टेबाजी होती थी कुछ ही दिनों में यह खेल लोगों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गया और यहीं से सटका मटका की शुरुआत हुई उसके बाद 1961 में इस खेल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया और जिससे इस खेल के प्रेमियों को अब कोई दूसरा रास्ता खोजना था

    फिर 1962 में कल्याण जी ने वर्ली मटका से नाम से फिर इस खेल की शुरुआत किया इसके बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ताल्लुक रखने वाले रतन खत्री ने भी इस खेल में मामूली बदलाव करके इस खेल को शुरू किया और खेल के नियम आम लोगों के हिसाब से बनाया गया


     कल्याण जी और रतन खत्री दोनों के सट्टे मटके के खेल में कोई ज्यादा भिन्नता नहीं थी केवल कल्याण जी का मटका सप्ताह के सभी दिनों चलता था जबकि रतन खत्री का मटका हफ्ते में 5 दिन ही चलता था

     धीरे धीरे लोग फिर से इस खेल में जुड़ते गए और वापस से यह खेल काफी लोकप्रिय हो गया लोगों के बीच में फिर बाद में इसका नाम बदलकर रतन मटका कर दिया गया फिर सन 1980 और 1990 तक यह खेल पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया इसके साथ साथ सट्टे की रकम में भी भारी बढ़ोतरी हुई


     फिर 1995 तक पूरे भारत में कुल रतन मटका के 2000 के लगभग बुकि  थे जो यह खेल खिलाते थे लेकिन फिर 2002 में इस खेल को भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया और सभी सट्टा मटका वाली जगहों को बंद करवा दिया गया जिसके कारण सटका मटका के कारोबार पर काफी असर पड़ा और इसको खिलाने वाले बुकिंग अब शहर से दूर रहने लगे जिस कारण लोगों को इस खेल में धीरे धीरे रूचि कम होने लगी और इस खेल का कोई व्यक्तिगत ठिकाना और कोई बड़ा स्रोत ना होने के कारण यह खेल धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया 


     लोग सट्टा मटका छोड़कर अन्य सट्टा के खेल जैसे क्रिकेट पर सट्टा, लॉटरी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने लगे ठीक इसी समय पर भारत में क्रिकेट पर सट्टा लगाने की शुरुआत हुई और अब वर्तमान में सटका मटका सिर्फ मुंबई और महाराष्ट्र तक ही सीमित रह गया है और इसको ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लाने की कोशिश की जा रही है पर सरकार से अनुमति न मिलने के कारण यह सभी खेल चोरी छुपे चल रहे हैं और इन चीजों की जगह इंटरनेशनल बेटिंग साइट्स जैसे bet365, बेटवे dream11, माय सर्कल लेवल, जैसी साइटों ने  ले ली है
    पर आज भी इंटरनेट पर कुछ साइट में मौजूद हैं जो ऑनलाइन सट्टा मटका खिलवाती हैं

    sataka mataka सट्टा मटका खेलने के नियम और खेला कैसे जाता है

    शुरुआत में यह खेल न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज और मुंबई टेक्सटाइल से जो कपास की मिली थी इनमें से ओपनिंग रेट और क्लोजिंग रेट तय कर कर खेली जाती थी फिर वक्त के साथ इनके नियमों में परिवर्तन हुआ और जब मैं मिलो द्वारा यह किस खेल को बंद कर दिया गया

     तब इस खेल में मटका का प्रयोग करना चालू कर दिया गया इसके बाद से ही इसका नाम सट्टा मटका प्रसिद्ध हुआ इस खेल में सभी लोग अपने नंबर की पर्ची बनाकर मटके में डालते हैं और जिसका डाला गया नंबर निकलता है वही खेल का विजेता होता है और उसे अपने लगाए हुए पैसे के साथ-साथ हारे हुए प्रतिभागियों के पैसे भी दिए जाते हैं

     उसके बाद 2002 में इस मटके का प्रयोग हटा दिया गया और इसकी जगह पर नंबर चुनने कर दिया गया जिसके चुने गए नंबर आते थे वही विजेता कहलाता था और उसको हारे के लोगों के भी पैसे प्राप्त होते थे  सट्टा मटका लॉटरी का रूपांतर रूप है यह कहना शायद गलत नहीं होगा फिर इन खेलों पर रोक लगने के बाद यह खेल सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित होकर रह गए हैं और इन खेलों को विभिन्न जगहों पर विभिन्न नाम से बुलाया जाता है जैसे Milan day, rajdhani day,Time bajar, supreme day, Milan night rajdhani night, supreme night, worli night main night, आदि

    सट्टा मटका या वर्ली मटका बंद होने के कारण


    सट्टा मटका बंद होने का प्रमुख कारण सरकार द्वारा लगाई गई प्रतिबंधन था था क्योंकि खेल ज्यादातर मिलो और फैक्ट्रियों में कार्य करने वाले मजदूरों द्वारा खेला जाता था जिसके कारण उनको वित्तीय क्षति होती थी और इसकी लत लग जाने के कारण इस खेल को वह काफी वित्त क्षति होने के बाद भी खेलते थे

     जिससे समाज और उनके परिवार पर बहुत बुरा असर पड़ता था और लोगों को घर तक बर्बाद हो जाते थे इसको देखते हुए सरकार द्वारा इन खेलों का बंद करा दी गई तब भी गैरकानूनी तरीके से महाराष्ट्र जैसी जगहों पर यह खेल आदमी खेले जाते हैं और इस खेल को ऑनलाइन भी करने की कोशिश की गई है लेकिन अन्य साइटों के आने के कारण सट्टा मटका जैसे खेलों  का रुझान लोगों के अंदर से बहुत कम हो गया है 


    Disclaimer
    यह साइट किसी भी प्रकार के गैरकानूनी खेल का प्रोत्साहन नहीं करती है यह जानकारी हेतु लिखा गया आर्टिकल है इसमें किसी प्रकार के सट्टेबाजी का खेल  गैर कानूनी है और से खेलना सभी के लिए हानिकारक है

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