पृथ्वीराज चौहान का संपूर्ण इतिहास | पृथ्वीराज चौहान का जीवन परिचय

पृथ्वीराज चौहान चौहान राजवंश के सबसे महान और दिल्ली के अंतिम हिंदू सम्राट थे, पृथ्वीराज चौहान ने 11 वर्ष की आयु में दिल्ली की राजगद्दी संभाली और अपने कुशलता और युद्ध नीति से अपने आसपास के राज्यों को जीता और भारत में बाहर से आने वाले आक्रमणकारियों को भी कई बार परास्त किया परआस्थ किया , इनके बाद कोई भी राजपूत राजा दिल्ली पर इनके शासन नहीं कर सका,

पृथ्वीराज चौहान बायो

नाम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान
शासन काल1149-1192 इ0एस0वी
पितासोमेश्वर चौहान
माताकर्पूरीदेवी चौहान
भाईप्रभा चौहान, हरी राज चौहान, गोविंद ताई, चंद दरबई
राज्यदिल्ली
राज धानी गुजरात
उपाधिपृथ्वीराज रासो,
पत्नीसंयोगिता
पुत्रझोरा, गोविंद राज चतुर्थ, शेखा
पृथ्वीराज चौहान

पृथ्वीराज चौहान का जन्म, परिवार

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 में गुजरात में हुआ था इनके पिता सोमेश्वर चौहान, स्वामी आर्राज चौहान के कनिष्ठ पुत्र थे तथा पृथ्वीराज चौहान की माता कपूरी देवी राजपूत घराने से ताल्लुक रखती थी तथा इनके पिता त्रिपुरा के राजा थे पृथ्वीराज चौहान जब 11 वर्ष के थे

तभी इनकी पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके कारण इन्होंने अपनी माता के साथ दिल्ली के सिंहासन पर बैठे, पृथ्वीराज चौहान बचपन से युद्ध पारंगत तीर धनुष चलाने में महारत हासिल थी इसके अलावा यह शब्द भेदी बाण चलाने में बहुत कम उम्र में सक्षम हो गए थे उन्होंने 8 वर्षों तक तलवारबाजी और घुड़सवारी की अभ्यास किया था

पृथ्वीराज चौहान कार्यकाल (1178-1192)

पृथ्वीराज चौहान 1961 में अपनी माता के साथ दिल्ली के सिंहासन पर बैठे, उनसे पहले इनके पिता के बड़े भाई पृथ्वीराज २ इस सिंहासन पर बैठते थे लेकिन उनका कोई पुत्र ना होने के कारण सोमेश्वर चौहान को गुजरात का राजा बना दिया गया जबकि पृथ्वीराज चौहान को युवराज बनाया गया लेकिन पिता की अचानक मृत्यु हो जाने के कारण पृथ्वीराज चौहान को सिंहासन पर बैठना पड़ा,

पृथ्वीराज चौहान ने 1978 से अपना असल में कार्यभार ग्रहण किया और अपने राज्यों की सीमा विस्तार बढ़ाने पर जोर दिया उन्होंने सबसे पहले अपने आसपास के राज्यों को जीतना चालू किया इनमें सबसे पहले चंदेल के राजा परम आदिदेव को युद्ध में परास्त किया

और उसके बाद अपने पड़ोसी राज्य जैसे राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, तक अपनी सीमाएं बढ़ाई, पृथ्वीराज चौहान ने कार्यकाल में कई सारे बाहरी आक्रमणकारियों को भी रोका, 1191 ईस्वी में इन्होंने मोहम्मद गौरी को तराइन के प्रथम युद्ध में बुरी तरीके से हरा दिया लेकिन राजपूत राजाओं के दगाबाजी और राजा जय चड की मोहम्मद गोरी से मिल जाने के कारण 1192 ईसवी का यह युद्ध हार गए

पृथ्वीराज चौहान का दोस्त

पृथ्वीराज चौहान का एक एक परम मित्र चंदबरदाई थे जो कि उनके साथ ही बचपन से बड़े हुए थे चंदबरदाई ने अपना पूरा जीवन पृथ्वीराज चौहान के साथ व्यतीत किया चंदबरदाई पृथ्वीराज चौहान के महल के सर्वश्रेष्ठ कवि सका और सहयोगी से इनके द्वारा ही पृथ्वीराज चौहान रासो ग्रंथ लिखा गया था गौरी के वक्त में विशेष भूमिका निभाई थी

उन्होंने एक दोहा चौहान को बताया था कि गौरी कितनी दूरी पर है जिसके कारण पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी के वध करने में सफलता हासिल की

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की कहानी

शिवराज चौहान संयोगिता की कहानी एक सच्चे प्रेम और उसके प्रति त्याग को दर्शाती है संयोगिता कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री थी उनके सौंदर्य की चर्चा पूरे भारतवर्ष में थी 1 दिन राजा जयचंद के दरबार में एक प्रसिद्ध चित्रकार आया उसने देश विदेश से कई सारे राजाओं के चित्र बनाए थे उन्हीं चित्रों में से एक चित्र पृथ्वीराज चौहान का भी था जिसको देखकर संयोगिता मंत्रमुग्ध हो गई थी और मन ही मन मैं पृथ्वीराज चौहान को अपना पति स्वीकार कर लिया था लेकिन राजा जयचंद पृथ्वीराज से अत्यधिक घृणा करते थे,

जिस कारण वह किसी भी हालत में पृथ्वीराज चौहान का विवाह अपनी पुत्री से नहीं कराना चाहते थे यह बात जब जयचंद को पता चली तो उन्होंने अब अपने महल में संयोगिता का स्वामवर रखा जहां पर महल के बाहर राजा जयचंद ने पति राज चौहान का मजाक उड़ाने के लिए उनकी मूर्ति रख दी लेकिन संयोगिता ने स्वयंवर में आयोजित सभी राजकुमारों को छोड़कर पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति पर माला चढ़ा दी और उन्हें अपना पति मान लिया

इस बात का पता चलते ही प्रथ्वी राज चौहान कन्नौज जाकर संयोगिता को ले आए और उनसे शादी कर ली

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच युद्ध

पृथ्वीराज चौहान अपने आसपास के राज्यों को जीत चुके हैं और अपने राज्य का और विस्तार चाहते थे जिस कारण उन्होंने पंजाब यहां पर मोहम्मद गौरी का शासन था, उस पर आक्रमण किया, पृथ्वीराज चौहान जानते थे कि अगर बाहरी आक्रमणकारियों को उन्हें भारत में आने से रोकना है तो उन्हें पंजाब पर जीत हासिल करनी होगी क्योंकि उस समय जितने भी आक्रमण होते थे ऊपर से ही होते थे,

जिस कारण मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच पहला घमासान युद्ध हुआ जिसे हम तराई का युद्ध भी कहते हैं जिसमें राज चौहान ने पंजाब हांसी सरस्वती और सरहिंद किले को जीत लिया इस मोहम्मद गौरी मरते-मरते बचे मोहम्मद गौरी की पूरी तरह से खत्म हो गई थी बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भाग्य थे और कुरान पर हाथ रखकर कसम खाई थी कि वह दोबारा कभी दूसरा चौहान पर आक्रमण नहीं करेंगे

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच दूसरा युद्ध

पृथ्वीराज चौहान से मिली हार से बोखलाए मोहम्मद गौरी अब बदला लेने की पूरी फिराक में थी उसने अपनी सेना फिर से तैयार की उधर राजा जयचंद भी अपनी पुत्री संयोगिता से शादी करने वाले पार्थवी राज चौहान से खुन्नस खाए बैठे थे और वह भी पृथ्वीराज चौहान से बदला लेना चाहते थे जिस कारण जयचंद ने मोहम्मद गौरी के साथ मिलकर पृथ्वीराज चौहान के राज्यों से जुड़ी जानकारी मोहम्मद गौरी को बता दे और उनकी कमजोरियों के बारे में भी मोहम्मद गौरी को बता दिया

, और एक बार फिर 1192 में मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच घमासान युद्ध हुआ जिसमें विक्रम चौहान की तीन लाख की सेना थी लेकिन जयचंद के कारण यह युद्ध हार गए इसका सबसे बड़ा कारण मोहम्मद गौरी की सेना में कुशल घुड़सवार थे

जिसने पृथ्वीराज चौहान की सेना को चारों तरफ से घेर लिया था जिस कारण चौहान कि सेना में शामिल हाथी आगे नहीं बढ़ पाए और मोहम्मद गौरी की सेना द्वारा बाण चलाने के कारण वह हाथी आगे ना बढ़ने के कारण पीछे ही चलेगा अपने ही सैनिकों को रौंदकर निकल गए जिस कारण चौहान की सेना को भारी क्षति हुई और वह युद्ध हार गए

पृथ्वीराज चौहान तराई के युद्ध में हार का कारण

पृथ्वीराज चौहान के हार का सबसे बड़ा कारण उनके राजपूत राजाओं का युद्ध में साथ ना देना और राजा जयचंद का मोहम्मद गौरी के साथ मिल जाना,

इसके अलावा सबसे बड़ा कारण पृथ्वीराज चौहान की सेना में कुशल घुर्सावरो की कमी थी पृथ्वीराज चौहान की सेना बड़ी जरूरत थी लेकिन उनके पास कुशलगढ़ सवारों की कमी थी, और मोहम्मद गौरी की सेना में 25000 कुशल घुड़सवार थे

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु

पृथ्वीराज चौहान को 1192 में युद्ध में बंदी बना लिया गया और उनको और उनके परम मित्र चंदबरदाई को लाहौर ले जाया गया जहां पर मोहम्मद गौरी, पृथ्वीराज चौहान से मिलने आए और इस्लाम धर्म अपनाने को कहा जिस पर प्रथ्वी राज चौहान ने मना कर दिया जिस पर मोहम्मद गोरी ने उनकी आंखें फोड़ दी लेकिन कुछ दिनों बाद मोहम्मद को उनकी आखिरी इच्छा पूछी तो पृथ्वीराज चौहान ने अपने सखा चंद्रवरदाई के शब्दों पर शब्दभेदी बाण चलाने की इच्छा प्रकट की

यह सुनकर मोहम्मद गौरी बेहद ही उत्सुक हो गया और उनके इस हुनर को देखने की इच्छा जाहिर की, फिर एक सभा के दौरान चंदबरदाई के दोहा सुनने के बाद उन्होंने मोहम्मद गौरी की तरफ शब्दभेदी बाण चलाएं और उस को खत्म कर दिया जिसके बाद पृथ्वीराज चौहान और चंदबरदाई ने आपस में एक दूसरे को चाकू मारकर एक दूसरे की जान ले ली

पृथ्वीराज चौहान पर आने वाली फिल्म

भारत के आखिरी हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सच्ची कहानी पर एक बार फिर बड़े पर्दे पर आने वाली है इस फिल्म का ट्रेलर 25 मई को रिलीज कर दिया गया था फिल्म में अक्षय कुमार पृथ्वीराज चौहान की भूमिका में दिखाई दिए है इसके अलावा चंदबरदाई के रोल में हमें सोनू सूद नजर आए है फिल्म 10 जून को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई थी और अभी तक फिल्म ने जबरदस्त कमाई भी कर ली है फिल्म सुपर डुपर हिट हुई है

पृथ्वीराज चौहान से जुड़ी अन्य जानकारी

पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को युद्ध में हराने के बाद उससे कसम खिलवा दी थी कुरान पर हाथ रखकर क्यों दोबारा कभी आक्रमण नहीं करेगा लेकिन दोबारा उसने आक्रमण किया

पृथ्वीराज चौहान आखरी दिल्ली के हिंदू सम्राट थे फिर इसके बाद कोई भी हिंदू सम्राट इनके जैसा नहीं हो सका और ना ही दिल्ली पर अपनी सत्ता हासिल कर सका

पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही शस्त्र चलाने और शब्द भेदी बाण चलाने में निपुण हो गए थे, 14 साल की आयु में ही राज गद्दी पर बैठ गए थे

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पृथ्वीराज चौहान की पत्नी के साथ क्या हुआ

पृथ्वीराज चौहान द्वारा 1192 का तराई का युद्ध हारने के बाद संयोगिता ने बाकी सभी दासियों के साथ आत्मदाह कर लिया था

पृथ्वीराज गौरी से क्यों हार गया?

पृथ्वीराज चौहान के हार का सबसे बड़ा कारण राजा जयचंद का मोहम्मद गौरी के साथ मिल जाना था और उनकी सेना में कुशल गुड़ सवारों की कमी भी कहीं ना कहीं प्रथ्वी राज की हार का कारण बनी

पृथ्वीराज चौहान का जन्म कहां हुआ था?

पृथ्वीराज चौहान गगन 1149 में गुजरात में हुआ था इनके पिता सोमेश्वर चौहान स्वामी आर्राज चौहान के कनिष्ठ पुत्र थे तथा पृथ्वीराज चौहान की माता कपूरी देवी राजपूत ग्रामीण से ताल्लुक रखती थी

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